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संस्कृत विभाग – गौरव, गरिमा और ज्ञान-ज्योति


संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, अपितु भारत की सनातन चेतना की वह दिव्य धारा है, जिसमें हमारी ज्ञान-परम्परा, सांस्कृतिक वैभव और दार्शनिक गाम्भीर्य सहस्राब्दियों से प्रवाहित होते आये हैं। यह भाषा उस अमर दीपशिखा के समान है, जिसकी ज्योति में वेदों का ज्ञान, उपनिषदों का रहस्य, पुराणों की कथा, महाकाव्यों की महिमा तथा दर्शन, आयुर्वेद, ज्योतिष्, गणित और व्याकरण की सूक्ष्मतं विद्या समाहित है।
संस्कृत की वैज्ञानिक संरचना और ध्वन्यात्मक शुद्धता इसे विश्व की प्राचीनतम एवं सर्वाधिक व्यवस्थित भाषाओं में प्रतिष्ठित करती है। इसका अध्ययन केवल शब्दों का ज्ञान नहीं कराता, बल्कि यह छात्रों के भीतर भारतीय संस्कृति की आत्मा, नैतिक मूल्यों की गहराई तथा आध्यात्मिक चिन्तन की ऊँचाई का साक्षात्कार कराता है। यह भाषा मन, मस्तिष्क और आत्मा—तीनों का समन्वित विकास करती है।
संस्कृत का स्वरूप संकीर्ण धार्मिक परिधि तक सीमित नहीं है, यह भारतीय दर्शन, तर्कशास्त्र और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की आधारशिला है। इसमें निहित ज्ञान-राशि मानव जीवन के प्रत्येक आयाम को आलोकित करने की क्षमता रखती है।
अतः संस्कृत का संवर्धन केवल अतीत का संरक्षण नहीं, बल्कि भविष्य का निर्माण भी है।
आज के वैश्विक परिप्रेक्ष्य में जब योग, आयुर्वेद और भारतीय दर्शन को विश्वभर में सम्मान और स्वीकृति मिल रही है, तब संस्कृत की प्रासंगिकता और भी अधिक सशक्त रूप में उभर कर सामने आयी है। यह भाषा न केवल सांस्कृतिक सेतु का कार्य करती है, बल्कि अंताराष्ट्रिय बौद्धिक संवाद की भी आधारभूमि बन रही है।
संस्कृत के विद्वानों की शिक्षा, अनुसंधान, अनुवाद, पुरातत्त्व, सांस्कृतिक अध्ययन तथा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निरन्तर आवश्यकता बनी हुई है। ऐसे में महाविद्यालय में संस्कृत विषय का प्रारम्भ एवं संबद्धता एक दूरदर्शी और युगानुकूल निर्णय है, जो विद्यार्थियों के लिये ज्ञान के नवीन द्वार खोलता है।
यह विभाग विद्यार्थियों को केवल पाठ्य ज्ञान ही नहीं देता, बल्कि उन्हें अपने मूल से जोड़कर एक सशक्त, संवेदनशील और विवेकशील नागरिक बनने की प्रेरणा भी प्रदान करता है। यह उनके व्यक्तित्व में ऐसी गरिमा और गहराई का संचार करता है, जो जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उन्हें विशिष्ट बनाती है।
"संस्कृतं नाम दैवी वाक्, ज्ञानस्य मूलमुत्तमम्।
येन प्रकाशितो लोकः, स एव भवति पावनः॥"
(अर्थ: संस्कृत दैवी वाणी है, जो समस्त ज्ञान का श्रेष्ठ स्रोत है ,जिसके द्वारा संसार प्रकाशित होता है, वही जीवन को पवित्र बनाती है।)
इस प्रकार संस्कृत विभाग केवल एक शैक्षणिक इकाई नहीं, बल्कि वह पवित्र साधना-स्थल है, जहाँ ज्ञान, संस्कृति और मूल्य इन तीनों का समन्वित विकास होता है और जहाँ से एक उज्ज्वल, संस्कारित एवं सशक्त भविष्य की दिशा प्रशस्त होती है।



Photo Faculty Name, Designation, Qualification
Prof. (Dr.) Bindu Singh,
Professor & Incharge,
Ph. D.
Dr. Sujeet Kumar,
Assistant Professor,(Level-11)
NET/JRF/D.Phil.(University of Allahabad)

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